ओवरथिंकिंग करना एक तरह से विचारों की भूलभुलैया में फंसने का मतलब यह नहीं होता कि उससे बाहर निकलने का रास्ता नहीं है। आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी, “खाली दिमाग शैतान का घर होता है।” यह कहावत काफी हद तक ओवरथिंकिंग पर भी लागू होती है। जब हम बिना किसी कारण के बैठे-बैठे व्यर्थ की चिंताएं करने लगते हैं, जो कि मन का एक स्वाभाविक स्वभाव भी है, तब ओवरथिंकिंग जन्म लेती है।
सुनने में यह समस्या छोटी लग सकती है, लेकिन यदि इसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह आगे चलकर डिप्रेशन, एंजायटी, पैनिक अटैक और कई अन्य मानसिक परेशानियों का कारण बन सकती है। बहुत से लोग यह समझते हैं कि लगातार सोचते रहना समस्या का समाधान है, जबकि वास्तविकता यह है कि जरूरत से ज्यादा सोचना कई बार समस्या को और बड़ा बना देता है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।Overthinking kaise kam kare kare यह सवाल आज लाखों लोग पूछते हैं, और अच्छी बात यह है कि इसका समाधान संभव है। Overthinking को नियंत्रित करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। कुछ सही स्वयं सहायता तरीकों और सकारात्मक आदतों को अपनाकर आप अपने मन को शांत कर सकते हैं। इस लेख में मैं आपको वे सभी प्रभावी तरीके बताऊंगा जो ओवरथिंकिंग को कम करने (Overthinking ko kam kerne) में मदद करते हैं। इनमें से कई बातें मेरी किताब डिप्रेशन और सामाजिक चिंता राहत में भी विस्तार से बताई गई हैं। यदि आप इन उपायों को समझकर अपने जीवन में लागू कर लेते हैं, तो धीरे-धीरे आपके विचारों पर आपका नियंत्रण बढ़ने लगेगा और मन की बेचैनी कम होने लगेगी। आगे इस लेख में मैं आपको बताऊंगा कि Overthinking kise kahate hai, Overthinking kyu hota hai, Overthinking kyu kerte hai, और सबसे महत्वपूर्ण Overthinking kaise kam kare। इसलिए इस लेख को धैर्यपूर्वक अंत तक जरूर पढ़ें।
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Overthinking किसे कहते है? (What is Overthinking In Hindi)

सरल शब्दों में कहें तो,
ओवरथिंकिंग मन की थकान है।
जब हमारा मन अतीत में हुई किसी घटना, वर्तमान की किसी परिस्थिति या भविष्य में होने वाली संभावनाओं के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है, तब जो विचारों का अंतहीन सिलसिला पैदा होता है, उसे Overthinking Kahate Hain। कई बार व्यक्ति किसी एक छोटी सी बात को लेकर घंटों सोचता रहता है। वह बार-बार उसी घटना को अपने मन में दोहराता है और उसके अलग-अलग परिणामों की कल्पना करता रहता है। धीरे-धीरे यह सोचने की आदत बन जाती है और मन को शांति नहीं मिलती। ओवरथिंकिंग केवल ज्यादा सोचने का नाम नहीं है, बल्कि ऐसा सोचने का नाम है जो आपके मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और वर्तमान जीवन को प्रभावित करने लगे। जब कोई विचार बार-बार आपके मन में आए और आप उसे रोक न पाएं, तब समझिए कि आपका मन ओवरथिंकिंग की अवस्था में पहुंच चुका है।
ओवरथिंकिंग क्यों होता है? (Reason Of Overthinking in Hindi)

जब हमारे जीवन में कोई बुरी घटना घट जाती है या हमें भविष्य में किसी बुरी घटना की आशंका होती है, तब हमारा मन बार-बार उसी विषय के बारे में सोचने लगता है। इसे हम आवर्थिंकिंग कहते है। शुरुआत में यह सामान्य चिंता होती है, लेकिन जब वही चिंता लगातार दोहराई जाती है तो का एक चक्र बन जाता है। यही चक्र धीरे-धीरे ओवरथिंकिंग में बदल जाता है।
उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का इंटरव्यू खराब चला गया हो, तो वह बार-बार उसी इंटरव्यू के बारे में सोच सकता है। वह यह कल्पना करता रहेगा कि उसे क्या कहना चाहिए था, क्या नहीं कहना चाहिए था, और अब आगे क्या होगा। यही दोहराव मानसिक तनाव पैदा करता है।
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हमारा मन जन्म से ही हमें सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। जब भी हमें डर, चिंता, असुरक्षा या घबराहट महसूस होती है, तब मन संभावित खतरों के बारे में सोचने लगता है। यही कारण है कि कठिन परिस्थितियों में ओवरथिंकिंग बढ़ जाती है। मन बार-बार यह जानना चाहता है कि आगे क्या होगा और किसी संभावित नुकसान से कैसे बचा जाए। हालांकि एक महत्वपूर्ण बात समझनी चाहिए कि ओवरथिंकिंग कोई असाधारण बीमारी नहीं है। यह एक ऐसी आदत है जो समय के साथ विकसित होती है। और अच्छी बात यह है कि जैसी आदत बनती है, वैसी बदली भी जा सकती है। इसलिए यदि आप सोच रहे हैं कि Overthinking kaise kam kare, तो सबसे पहले यह समझ लीजिए कि यह आपकी स्थायी पहचान नहीं है। यह केवल एक मानसिक पैटर्न है, जिसे बदला जा सकता है।
ओवरथिंकिंग कैसे कम करे? 11 आसान तरीके (11 Easy Tips to Reduce Overthinking)

ओवरथिंकिंग को कम करना (Reducing Overthinking) कठिन नहीं है, लेकिन इसके लिए दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है। आइए उन तरीकों को जानते हैं जो इस समस्या को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
1. खुद को काम में व्यस्त कर लें
ओवरथिंकिंग की शुरुआत अक्सर तब होती है जब हम खाली बैठकर जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं। धीरे-धीरे यह सोचने का पैटर्न आदत बन जाता है। इसलिए ओवरथिंकिंग (Overthinking) से बचने का सबसे पहला तरीका है खुद को किसी न किसी सार्थक कार्य में व्यस्त रखना। जब हम काम में लगे रहते हैं तो हमारा दिमाग सक्रिय रहता है। शरीर और मन दोनों ऊर्जा का सही उपयोग करते हैं। इससे नकारात्मक विचारों के लिए कम जगह बचती है
यदि किसी समय आपके पास कोई विशेष काम नहीं है, तब भी सकारात्मक अकेलेपन को अपनाइए। सकारात्मक अकेलापन वह अवस्था है जिसमें आप अकेले तो होते हैं, लेकिन नकारात्मक विचारों में नहीं डूबते। आप स्वयं को मजबूत बनाने, सीखने और भविष्य के लिए सकारात्मक सोच विकसित करने में समय लगाते हैं।
2. अपने ख्यालों पर गौर करें और उन्हें नोट करें
जिन चीजों पर हम ध्यान नहीं देते, वे कई बार बाद में हमें नुकसान पहुंचाती हैं। यही बात विचारों पर भी लागू होती है। यदि आप लगातार अपने नकारात्मक विचारों को दबाने की कोशिश करते हैं, तो वे और अधिक ताकत के साथ वापस आते हैं। इसका एक प्रभावी उपाय है कि आप अपने विचारों को लिखना शुरू करें। डायरी, नोटबुक या किसी मोबाइल एप में अपने विचारों को दर्ज करें।
विशेष रूप से सकारात्मक विचारों, उपलब्धियों और अच्छे अनुभवों को लिखने की आदत डालें। उन्हें रोज पढ़ें।
इससे आपकी आंतरिक आवाज मजबूत होगी और धीरे-धीरे नकारात्मक विचारों का प्रभाव कम होने लगेगा। जब आप अपने विचारों को समझने लगते हैं, तब Overthinking kaise kam kare kare का उत्तर भी धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगता है।
3. वर्तमान पर केंद्रित रहें
ओवरथिंकिंग (Overthinking) की सबसे बड़ी वजह यह है कि हम वर्तमान से अधिक अतीत और भविष्य में जीने लगते हैं। अतीत वह है जो बीत चुका है और भविष्य वह है जो अभी आया नहीं है। लेकिन हमारा मन अक्सर इन्हीं दोनों के बीच उलझा रहता है। मैंने अपनी किताब *मन के ज़ख्म भर सकते हैं शब्द* में एक कथन लिखा है—
“अतीत आपको तब तक चोट देता है, जब तक आप उसे भुला नहीं देते।”
इसलिए अपने वर्तमान कार्य पर पूरा ध्यान दें। जो काम अभी आपके सामने है, उसी में अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करें। जब व्यक्ति वर्तमान में जीना सीख जाता है, तब उसका मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है।
4. सही लोगों का चुनाव करें
हमारे आसपास के लोग हमारी मानसिक स्थिति को गहराई से प्रभावित करते हैं।
यदि आपके आसपास ऐसे लोग हैं जो हमेशा आपकी आलोचना करते हैं, आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं या आपकी पीठ पीछे निंदा करते हैं, तो उनसे दूरी बनाना ही बेहतर है।
ऐसे लोग अक्सर तनाव और ओवरथिंकिंग को बढ़ाते हैं। इसके विपरीत सकारात्मक, प्रेरणादायक और सहयोगी लोगों के साथ समय बिताने से मानसिक शांति बढ़ती है और आत्मविश्वास मजबूत होता है।
5. जीवन में अनुशासन कायम रखें
एक स्कूल इसलिए सुचारु रूप से चलता है क्योंकि उसमें अनुशासन होता है। यही बात जीवन पर भी लागू होती है। अनुशासन केवल समय पर उठने या सोने तक सीमित नहीं है। यह आपके विचारों, आदतों और व्यवहार को भी व्यवस्थित करता है। मैंने अपनी किताबों में भी लिखा है कि अनुशासन के बिना न तो कोई संस्था चल सकती है और न ही कोई व्यक्ति अपने जीवन में स्थिरता प्राप्त कर सकता है। एक अनुशासित जीवन मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है। इससे सकारात्मकता बनी रहती है, और व्यक्ति कई मानसिक समस्याओं से दूर रहता है।
6. अपनी सोच को चुनौती दें
कई बार हमारा मन जो सोचता है, वह पूरी तरह सच नहीं होता। यदि आपके मन में कोई नकारात्मक विचार (Negative thought) आ रहा है, तो स्वयं से पूछिए—
- क्या यह विचार पूरी तरह सच है?
- क्या इसके पक्ष में कोई प्रमाण है?
- क्या मैं स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर देख रहा हूं?
ऐसे प्रश्न आपके विचारों की वास्तविकता को समझने में मदद करते हैं और अनावश्यक चिंता को कम करते हैं।
7. कभी सही के लिए पश्चाताप न करें
यदि आपसे कोई गलती अनजाने में हो गई है और आपका उद्देश्य गलत नहीं था, तो उस बात को लेकर बार-बार पश्चाताप करने का कोई लाभ नहीं है। भगवान भी उन गलतियों के लिए क्षमा कर देता है जो हम अनजाने में करते हैं।
बस इतना ध्यान रखें कि जानबूझकर किसी का नुकसान न करें। क्योंकि जानकर किया गया गलत कर्म और अनजाने में हुई गलती दोनों में बहुत अंतर होता है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए स्वयं को क्षमा करना सीखना भी आवश्यक है।
8. योग साधना करें
योग, प्राणायाम, मॉर्निंग वॉक और नियमित व्यायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। जब शरीर सक्रिय रहता है तो मन भी संतुलित रहता है। योग केवल शरीर को नहीं बल्कि विचारों को भी शांत करता है। नियमित अभ्यास से मन की बेचैनी कम होती है और नकारात्मक विचारों की संख्या घटने लगती है।
यदि आप सच में जानना चाहते हैं कि Overthinking kaise kam kare, तो योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा अवश्य बनाइए।
9. पर्याप्त नींद लें
कम नींद लेने से दिमाग अधिक संवेदनशील और थका हुआ महसूस करता है। ऐसी स्थिति में नकारात्मक विचार तेजी से बढ़ते हैं। हर दिन पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लेने का प्रयास करें। सोने से पहले मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग कम करें। अच्छी नींद मन को रीसेट करने का काम करती है और विचारों की अनावश्यक भीड़ को कम करती है।
10. अच्छा कंटेंट देखें और सुनें
खाली समय में अच्छा संगीत सुनना मन को शांत करने का प्रभावी तरीका है। आज इंटरनेट पर नकारात्मक सामग्री मौजूद है, लेकिन साथ ही बहुत अच्छा और प्रेरणादायक कंटेंट भी उपलब्ध है।
मोटिवेशनल वीडियो, प्रेरणादायक पुस्तकें, सकारात्मक विचार, संतों के प्रवचन और आध्यात्मिक सामग्री मन को नई दिशा देती है। प्रेमानंद जी जैसे संतों का सत्संग सुनना कई लोगों के लिए मानसिक शांति का स्रोत रहा है।
11. स्वयं को समय दें
हर समस्या का समाधान तुरंत नहीं मिलता।
यदि आप लंबे समय से ओवरथिंकिंग की आदत से जूझ रहे हैं, तो स्वयं को बदलने के लिए समय भी दीजिए।
अपने ऊपर अनावश्यक दबाव मत डालिए। छोटे-छोटे सुधारों को स्वीकार कीजिए और लगातार प्रयास करते रहिए। धीरे-धीरे आपका मन नए तरीके से सोचने लगेगा और जीवन पहले की तुलना में अधिक शांत महसूस होगा।
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इस लेख में मैने आपको बताया Overthinking kise kahate hai, Overthinking kyu hota hai, Overthinking kyu kerte hai, और सबसे महत्वपूर्ण Overthinking kaise kam kare। साथ ही मैंने उन आसान और व्यावहारिक तरीकों को भी साझा किया जिनकी मदद से आप अपने मन को शांत कर सकते हैं और विचारों के अनावश्यक बोझ को कम कर सकते हैं।
यदि आप इन उपायों को नियमित रूप से अपनाते हैं, तो धीरे-धीरे आपका मन वर्तमान में रहना सीख जाएगा और नकारात्मक सोच का प्रभाव कम होने लगेगा। इस विषय पर मेरी आखिरी सलाह यही है कि नकारात्मक बातों को मन में जमा करने के बजाय उन्हें छोड़ना सीखिए। मान लीजिए आपके हाथ में कॉफी का एक गिलास है। यदि आप उसे पांच मिनट तक पकड़ते हैं तो कुछ नहीं होगा। एक घंटे तक पकड़ेंगे तो हाथ दर्द करने लगेगा और यदि पूरे दिन पकड़े रहेंगे तो शायद आप थककर गिर भी जाएं। हमारे विचार भी कुछ ऐसे ही होते हैं। समस्या विचारों के आने में नहीं है, बल्कि उन्हें लगातार पकड़े रखने में है।
Overthinking kaise kam kare kare का एक बड़ा उत्तर यही है कि हर विचार को उतनी ही अहमियत दें जितनी वह वास्तव में योग्य है।
मैं जानता हूं कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होती। कई बार यह भीतर का एक कठिन संघर्ष बन जाती है। लेकिन विश्वास रखिए, बदलाव संभव है। यदि आप अपने मन की नकारात्मक आदतों से लड़ने का निर्णय लेते हैं तो धीरे-धीरे जीत आपकी ही होती है।
मेरा एक विचार हमेशा रहा है कि हमारे सबसे बड़े दुश्मन का अस्तित्व बाहर की दुनिया में नहीं, बल्कि कई बार हमारे अपने मन के भीतर होता है। जब हम उस मन को समझना और संभालना सीख जाते हैं, तब जीवन पहले से कहीं अधिक शांत, संतुलित और सुखद बन जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. ओवरथिंकिंग क्या होती है?
ओवरथिंकिंग एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति किसी घटना, समस्या या परिस्थिति के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है। वह एक ही बात को बार-बार मन में दोहराता रहता है, जिससे तनाव, चिंता और मानसिक थकान बढ़ने लगती है।
2. ओवरथिंकिंग क्यों होती है?
ओवरथिंकिंग (Overthinking)मुख्य रूप से डर, चिंता, असुरक्षा, भविष्य की चिंता या अतीत की घटनाओं के कारण होती है। जब मन किसी समस्या का समाधान खोजने के बजाय उसी पर लगातार विचार करता रहता है, तब ओवरथिंकिंग शुरू हो जाती है।
3. Overthinking kaise kam kare?
Overthinking को कम करने के लिए खुद को व्यस्त रखें, वर्तमान पर ध्यान दें, योग और व्यायाम करें, सकारात्मक लोगों के साथ रहें, अच्छी नींद लें और अपने विचारों को लिखने की आदत विकसित करें। नियमित अभ्यास से मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है।
4. क्या ओवरथिंकिंग एक मानसिक बीमारी है?
ओवरथिंकिंग स्वयं कोई मानसिक बीमारी नहीं है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने पर यह एंजायटी, तनाव, डिप्रेशन और पैनिक अटैक जैसी मानसिक समस्याओं को बढ़ा सकती है। इसलिए समय रहते इसे नियंत्रित करना जरूरी है।
5. क्या ओवरथिंकिंग से नींद प्रभावित होती है?
हाँ, ओवरथिंकिंग का सबसे बड़ा प्रभाव नींद पर पड़ता है। जब दिमाग लगातार विचारों में उलझा रहता है, तब व्यक्ति को सोने में परेशानी होती है और नींद की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है।
6. क्या योग और ध्यान ओवरथिंकिंग को कम कर सकते हैं?
जी हाँ, योग, ध्यान और प्राणायाम मन को शांत करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक हैं। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण मिलने लगता है।
7. क्या ओवरथिंकिंग हमेशा नकारात्मक होती है?
नहीं, हर तरह की गहरी सोच ओवरथिंकिंग नहीं होती। किसी विषय पर विचार करना सामान्य बात है। समस्या तब होती है जब सोचने की प्रक्रिया अनियंत्रित हो जाए और व्यक्ति बार-बार उसी बात को सोचकर खुद को मानसिक रूप से परेशान करने लगे।
8. क्या सकारात्मक कंटेंट देखने से ओवरथिंकिंग कम होती है?
हाँ, प्रेरणादायक पुस्तकें, सकारात्मक वीडियो, आध्यात्मिक प्रवचन और अच्छा संगीत मन को नई दिशा देते हैं। इससे नकारात्मक विचारों का प्रभाव कम होता है और मानसिक शांति बढ़ती है।
9. क्या ओवरथिंकिंग को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है?
ओवरथिंकिंग को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उसे नियंत्रित करना अधिक महत्वपूर्ण है। सही आदतें, सकारात्मक सोच, अनुशासन और नियमित मानसिक अभ्यास के माध्यम से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है।
10. क्या ओवरथिंकिंग से आत्मविश्वास कम हो सकता है?
हाँ, लगातार नकारात्मक सोचने से व्यक्ति अपने फैसलों पर संदेह करने लगता है। इससे आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि व्यक्ति अपने विचारों को समझे और उन पर स्वस्थ तरीके से काम करे।
11. ओवरथिंकिंग से तुरंत राहत पाने का सबसे आसान तरीका क्या है?
यदि आपको अचानक बहुत ज्यादा विचार आ रहे हैं, तो कुछ देर टहलें, गहरी सांस लें, पसंदीदा संगीत सुनें या किसी काम में खुद को व्यस्त कर लें। इससे दिमाग का ध्यान नकारात्मक विचारों से हटने लगता है और मन हल्का महसूस करता है।
12. क्या Overthinking kaise kam kare kare का कोई स्थायी समाधान है?
हाँ, यदि आप नियमित रूप से वर्तमान में जीने की आदत डालते हैं, अनुशासित जीवन अपनाते हैं, अपने विचारों को समझते हैं और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं, तो Overthinking kaise kam kare kare का स्थायी समाधान धीरे-धीरे आपके जीवन का हिस्सा बन सकता है।
लेखक द्वारा जरूरी सलाह:

यह एक स्वयं सहायता और जागरूकता आधारित लेख है, जिसका उद्देश्य पाठकों को जानकारी, आत्मबल और सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करना है। यह लेख किसी चिकित्सीय निदान, उपचार या पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।
यदि आप पहले से किसी मानसिक, शारीरिक या चिकित्सीय समस्या का उपचार ले रहे हैं, तो बिना डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी दवा या उपचार को बंद न करें।
लेखक द्वारा जरूरी संदेश:

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— लेखक कनिष्क शर्मा

